Devi : Bhartiya Nari Ke Gyan Chetna Aur Gaurav Ka Utkarsh
ऋग्वेद के दशम मंडल के 10 वें अध्याय के 125 वें सूक्त की आठ ऋचाएं हैं जिन्हें देवी सूक्त कहा जाता है जिसकी द्रष्टा महर्षि ब्रह्मज्ञानिनी वाक् थीं। वाक् ने प्रकृति की सर्जना शक्ति के साथ तादात्म्य कर देवी सूक्त उसी का उद्घाटन किया। इस सूक्त के अनुसार देवी ही इस सम्पूर्ण जगत की अधिष्ठात्री हैं, पितृ व्यवस्था भी देवी के ही अधीन है। स्त्रियाँ देवी इसलिए हैं क्योंकि वे सृजन, पालन और पोषण की शक्ति का प्रतीक हैं। प्रायः यह कहा जाता है कि स्त्रियों द्वारा बनाई गयी दुनिया की व्याख्या पुरुषों ने की है। यह पुस्तक पुस्तक सामाजिक संरचना, विद्या और संस्कृति, चेतना और भाव में स्त्रियों की भागीदारी जानने के लिए लिखी गयी है जो ब्रह्म्वादिनियों, उपनिषद चर्चाओं के स्रोत के रूप में महिलाओं और मध्यकाल के डार्क एरा में भी ज्ञान की लौ जलाने वाली स्त्रियों को उद्घाटित करती है।
Devi : Bhartiya Nari Ke Gyan Chetna Aur Gaurav Ka Utkarsh

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